Saturday, May 30, 2020

Meditation techniques (ध्यान तंत्र: (VBT44) विज्ञान भैरव तंत्र ४४)


हर मास में, आपके सामने में एक ध्यानतंत्र रखुंगा | इसमें मूल संस्कृत श्लोक के साथ स्वामी सत्यसंगानंदा सरस्वती द्वारा किया हुआ अंग्रेजीमें वस्तुतः अनुवाद रहेगा | तथा हिंदीमें व्रजवल्लभ द्विवेदी द्वारा लिखा हुआ हिंदी भावानुवाद रहेगा | अन्तमें ओशो रजनीश द्वारा उस ध्यान तंत्र पर दिये हुए भाषण का सार तथा उसका मैने किया हुआ मराठी भावानुवाद रहेगा |
मेरा आपसे अनुरोध है की यह ध्यान तंत्र केवल जानकारी हेतू पढने के बजाय इसकी अनुभूती करने का प्रयास करे | अपने स्वभाव विशेष के अनुसार इसमेसे एक ही तंत्र आपको अंतिम अनुभूती देनेमें सक्षम है | इसकी खोज आपको करनी है |
हरी ओम त् सत् !           
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Every month I will be sharing one technique of meditation. There will be original Sanskrut text, and English / Marathi / Hindi commentary on the technique. I expect reader should not take it as just a piece of information but practice the technique that suits him/her for at least one month to further the spiritual quest.

| These 112 meditation techniques are the ultimate source for self realization | 


विज्ञान भैरव तंत्र    
VidnyanBhairav Tantra

श्री देव्युवाच
श्रुतं देव मया सर्वं रुद्रयामलसम्भवम् |
त्रिकभेदमशेषेणसारात्सारविभागशः ||

अद्यपि न निवृत्तोमे संशय: परमेश्वर |
किं रुपं तत्वतो देव शब्दराशिकलामयम् ||

किं वा नवात्मभेदेन भैरवे भैरवाकृतौ |
त्रिशिरोभेदभिन्नं वा किं वा शक्तित्रयात्मकम् ||

नादबिन्दुमयंवापिकिंचंद्रार्धनिरोधिका: |
चक्रारुढमनच्कं वा किं वा शक्तिस्वरुपकम् ||


परापराया: सकलम्अपरायाश्च वा पुनः |
परायायदितद्वत्स्यात्परत्वंतद्विरुध्यते ||

नहि वर्ण विभेदेनदेहभेदेन वा भवेत् |
परत्वंनिष्कलत्वेनसकलत्वे न तदभवेत् ||

प्रसादंकुरुमे नाथ नि:शेषंछिन्धिसंशयम् |


भैरव उवाच
साधु साधुत्वयापृष्टंतन्त्रसारमिदंप्रिये |

गूहनीयतमं भद्रे तथापिकथयामि ते |
यत्किञ्चित्सकलं रुपं भैरवस्यप्रकीर्तितम् ||

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देवीने प्रश्न किया...

हे शिवा! आपका सत्य स्वरूप क्या है?
यह आश्चर्य से भरा जगत्क्या है?
बीज का मूलतत्वक्या है?
संसाररुपी चक्र के केंद्रस्थान पर क्या है?
सगुण विश्व के परे क्या है?
निर्गुण अमृतत्वको पाना क्या संभव है?
कृपया मेरे प्रश्नों का समाधान किजीये...

शिव ने उत्तर स्वरूप ११२ ध्यानतंत्र का प्रस्फुटन किया | अखिल विश्व के सभी पंथ-संप्रदाय इसीके एक अथवा अधिक तंत्र पद्धती केउपयोग से उत्पन्न हुए है | भूत, वर्तमान और भविष्य के संत, प्रेषित इसी तंत्र पद्धती के फलस्वरूप है |

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देवीने विचारले...

हे शिवा! तुझे खरे स्वरुप काय आहे?
हे अचंबित करणारे जगत काय आहे?
बीजाचे मूलतत्व काय आहे?
संसाररुपी चक्राच्या केंद्रस्थानी काय आहे?
नामरुपांच्यापलिकडे काय आहे?
नामरुपातीतअमृतत्वाची प्राप्ती शक्य आहे का?
कृपया माझे शंकानिरसन करा...

शिवाने उत्तरादाखल ११२ ध्यानतंत्रे सांगितली. ज्ञात-अज्ञात विश्वातील सर्व पंथसंप्रदाय,ज्ञानमार्ग यातील एक अथवा अधिक तंत्र पद्धतीद्वारा उत्पन्न झाले. भूतवर्तमान तसेच भविष्य काळातील तत्त्ववेत्तेप्रेषित यातील एक अथवा अधिक तंत्रपद्धतीचेफलस्वरुप आहेत.  

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Devi Asks:

O Shiva, what is your reality?
What is this wonder-filled universe?
What constitutes seed?
Who centres the universal wheel?
What is this life beyond form pervading forms?
How may we enter it full, above space and time, names and descriptions?
Let my doubts be cleared!

Now Shiva replies and describes 112 meditation techniques.  All the religions of the world, all the seers of the world, have reached the peak through some technique or other, and all those techniques will be in these one hundred and twelve techniques.

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तंत्र ४४

वहनेर्विषस्य मध्ये तु चित्तं सुखमयंक्षिपेत् |
केवलंवायुपूर्णं वा स्मरानन्देनयुज्यते ||
One should throw the blissful mind into the fire (manipura chakra), in the middle of the fibre-like lotus stalk (sushumna) or into which is only full of air (anahat chakra). Then one is united with the remembrance of bliss.

प्राण की श्वास-प्रश्वास की प्रक्रीया में जब वायु ऊर्ध्व-मुख अधः सहस्त्रार कमल में प्रविष्ट हो जाता है, तब जीव की असीम शक्ती संकुचित हो जाती है | शक्ती के इसी संकोच स्थान को योगशास्त्र में वन्ही के नाम से जाना जाता है | यही पवन जब नासिका मार्ग से न निकलकर उपर के सहस्त्रार कमल की ओर बढता हुआ सूक्ष्म प्राणशक्ती के रूप में विशुद्धी चक्र का भेदन कर ऊर्ध्व कुंडलिनी, अर्थांत उपर के अधोमुख सहस्त्रार कमल में प्रविष्ट हो जाता है और वहा विश्राम करता है, तो उसकी शक्ती का विकास होने लगता है |

Intone AUM to enter soundlessness
(Dharana on manipura and anahata)

Try to hear any subtlest sound around. Train ears by listening natural sounds. Sensitive ears can discriminate between three sounds in AUM. Intone slowly three sounds separately. Step by step drop ‘A’ & ‘M’ and get engrossed in ‘U’. In the very effort thinking will stop and once ‘U’ is also dropped you will enter into soundlessness.  

कोणत्याही शब्दामागील  नादाच्या जाणीवेतून अनाहत नादाची अनुभूती शक्य...

एका शब्दातील विविध नादांची जाणीव केवळ संवेदनशील कानाच्या सहाय्याने शक्य. सभोवतालातीलसूक्ष्मातिसूक्ष्म नाद ऐकण्याचा प्रयत्न करा. ओंकारातील तीन नाद स्वतंत्र. प्रत्येक नाद स्वतंत्र ऐकण्याच्या प्रयत्नात मन स्थिर होऊन विचारांचा विलय. स्थिर मनाद्वारेअनाहत नादाची अनुभूती आणी त्याद्वारे आत्मानुभूती.
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