Friday, July 31, 2026

Meditation techniques (ध्यान तंत्र: VBT विज्ञान भैरव तंत्र) 112e

हर मास में, आपके सामने में एक ध्यानतंत्र रखुंगा | इसमें मूल संस्कृत श्लोक के साथ स्वामी सत्यसंगानंदा सरस्वती द्वारा किया हुआ अंग्रेजीमें वस्तुतः अनुवाद रहेगा | तथा हिंदीमें व्रजवल्लभ द्विवेदी द्वारा लिखा हुआ हिंदी भावानुवाद रहेगा | अन्तमें ओशो रजनीश द्वारा उस ध्यान तंत्र पर दिये हुए भाषण का सार तथा उसका मैने किया हुआ मराठी भावानुवाद रहेगा |

मेरा आपसे अनुरोध है की यह ध्यान तंत्र केवल जानकारी हेतू पढने के बजाय इसकी अनुभूती करने का प्रयास करे | अपने स्वभाव विशेष के अनुसार इसमेसे एक ही तंत्र आपको अंतिम अनुभूती देनेमें सक्षम है | इसकी खोज आपको करनी है |

हरी ओम त् सत् !             

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Every month I will be sharing one technique of meditation. There will be original Sanskrut text, and English / Marathi / Hindi commentary on the technique. I expect reader should not take it as just a piece of information but practice the technique that suits him/her for at least one month to further the spiritual quest.

 

| These 112 meditation techniques are the ultimate source for self-realization | 

 

अजरामरतामेति सोsणीमादिगुणान्वितः |

योगिनीनाम प्रियो देवी सर्वमेलापकाधिपः |

जीवान्नपि विमुक्तोsसौ कुर्वन्नपि न लिप्यते |

 

O Godess, by virtue of even one of these dharanas, the sadhaka becomes free from old age, attains immortality and endowed with siddhis such as anima, etc. He becomes the darling of all yoginis and master of all siddhas. He is liberated while living and not affected by the activities of the world while active.

 

जैसे देवगण सोमरस का पान कर अजर-अमर हो गये, उसी तरह से उपर बताई गयी धारणामें दृढ अभ्यास से प्राप्त हुए विज्ञान रुपी सोमरस का पान कर योगी अजर और अमरही हो जाता है| उसको अणिमा प्रभृति सिद्धीया प्राप्त हो जाती है | वह योगीनियोका ज्ञान-क्रिया-आनंद प्रभृति शक्तियो का स्वामी हो जाता है और सभी मेलापको का अधिपति बन जाता है | इस प्रकार का साधक जीवन्मुक्त कहलाता है | वह सभी प्रकार के क्रियाकलापों को करता हुआ भी उनमे लिप्त नही होता, उसमे रस नही लेता है |

 

Master of yogis and siddhas

(Path towards immortality)

Each of the dharanas described so far has the potential power to completely alter the molecular structure and transform the awareness. The worries, anxieties, desires and thoughts that assail us are the cause of aging, ignorance and impotence in our lives. But one who has transcended theses becomes the favourite amongst the enlightened and attains the most favoured status.

 

 

ज्याप्रमाणे सोमरस प्राशन करून देव अमर झाले, त्याचप्रमाणे, वर उल्लेखलेल्या धारणेच्या दृढ अभ्यासाने प्राप्त झालेल्या ज्ञानाचा सोमरस प्राशन करून योगी अमर आणि शाश्वत होतो. त्याला अणिमा इत्यादी सिद्धी प्राप्त होतात. तो योगिनींच्या ज्ञान, कर्म, आनंद इत्यादी शक्तींचा स्वामी आणि सर्व संयोगांचा शासक बनतो. अशा साधकाला जीवनमुक्त म्हटले जाते. सर्व प्रकारची कार्ये करत असतानाही, तो त्यात गुंतत नाही, त्यात रस घेत नाही.

 

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Tuesday, June 30, 2026

Meditation techniques (ध्यान तंत्र: VBT विज्ञान भैरव तंत्र) 112d

हर मास में, आपके सामने में एक ध्यानतंत्र रखुंगा | इसमें मूल संस्कृत श्लोक के साथ स्वामी सत्यसंगानंदा सरस्वती द्वारा किया हुआ अंग्रेजीमें वस्तुतः अनुवाद रहेगा | तथा हिंदीमें व्रजवल्लभ द्विवेदी द्वारा लिखा हुआ हिंदी भावानुवाद रहेगा | अन्तमें ओशो रजनीश द्वारा उस ध्यान तंत्र पर दिये हुए भाषण का सार तथा उसका मैने किया हुआ मराठी भावानुवाद रहेगा |

मेरा आपसे अनुरोध है की यह ध्यान तंत्र केवल जानकारी हेतू पढने के बजाय इसकी अनुभूती करने का प्रयास करे | अपने स्वभाव विशेष के अनुसार इसमेसे एक ही तंत्र आपको अंतिम अनुभूती देनेमें सक्षम है | इसकी खोज आपको करनी है |

हरी ओम त् सत् !             

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Every month I will be sharing one technique of meditation. There will be original Sanskrut text, and English / Marathi / Hindi commentary on the technique. I expect reader should not take it as just a piece of information but practice the technique that suits him/her for at least one month to further the spiritual quest.

 

| These 112 meditation techniques are the ultimate source for self-realization | 


अत्र चैकतमे युक्तो जायते भैरव: स्वयम |

वाचा करोति कर्माणि शापानुग्रहकारकः ||

One attains the state of bhairava, if established even in one of these 112 techniques, and by his speech he confers blessings or curses.

 

अब तक बताये गये उपदेशो में से किसी एक में भी समाहित हो जाने वाला साधक, अर्थात इन धारणाओ मे से किसी एक का भी निष्टापूर्वक अभ्यास करनेवाला योगी, भले ही मायामय उपाधि से आविर्भूत जागतिक प्रपंच में रम रहा हो, बिना प्रयत्न से वचन मात्र से सब कुछ कर सकता है, किसी को भी शाप या वरदान देने में समर्थ हो सकता है | इस प्रकार का सामर्थ्य आ जाने पर भी जो साधक इसका उपयोग न कर निरंतर समाधि में लीन बना रहता है, उसके चित्त में स्थिर आत्मस्वरूप की अभिव्यक्ती हो जाती है, वह स्वयं साक्षात भैरव बन जाता है, यह धृव सत्य है |

 

Perfection on one dhrana

(Importance of abhyas)

The one hundred and twelve dharanas that have been described are so effective that, even if one of them is mastered, the state of bhairava is experienced. That state of consciousness is so powerful that the words uttered by such person inevitably come true. In this way, speech confers on blessings or curses, as one becomes a medium for the transmission of divine energy in this world.

 

आतापर्यंत सांगितलेल्या धारणांपैकी पैकी कोणत्याही एका धारणेत तल्लीन झालेला साधक, म्हणजेच यापैकी कोणत्याही संकल्पनेचा प्रामाणिकपणे सराव करणारा योगी, जरी तो मायावी उपाधीमुळे निर्माण झालेल्या सांसारिक गोष्टींमध्ये गुंतलेला असला तरी, केवळ शब्दांनी कोणत्याही प्रयत्नाशिवाय सर्व काही करू शकतो, तो कोणालाही शाप किंवा आशीर्वाद देण्यास सक्षम होऊ शकतो. अशी शक्ती प्राप्त केल्यानंतरही, जो साधक तिचा वापर करत नाही आणि सतत ध्यानात तल्लीन राहतो, त्याच्या मनात आत्म्याचे स्थिर स्वरूप प्रकट होते, तो स्वतःच भैरव बनतो, हे एक परम सत्य आहे.

 

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Sunday, May 31, 2026

Meditation techniques (ध्यान तंत्र: VBT विज्ञान भैरव तंत्र) 112c

हर मास में, आपके सामने में एक ध्यानतंत्र रखुंगा | इसमें मूल संस्कृत श्लोक के साथ स्वामी सत्यसंगानंदा सरस्वती द्वारा किया हुआ अंग्रेजीमें वस्तुतः अनुवाद रहेगा | तथा हिंदीमें व्रजवल्लभ द्विवेदी द्वारा लिखा हुआ हिंदी भावानुवाद रहेगा | अन्तमें ओशो रजनीश द्वारा उस ध्यान तंत्र पर दिये हुए भाषण का सार तथा उसका मैने किया हुआ मराठी भावानुवाद रहेगा |

मेरा आपसे अनुरोध है की यह ध्यान तंत्र केवल जानकारी हेतू पढने के बजाय इसकी अनुभूती करने का प्रयास करे | अपने स्वभाव विशेष के अनुसार इसमेसे एक ही तंत्र आपको अंतिम अनुभूती देनेमें सक्षम है | इसकी खोज आपको करनी है |

हरी ओम त् सत् !             

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Every month I will be sharing one technique of meditation. There will be original Sanskrut text, and English / Marathi / Hindi commentary on the technique. I expect reader should not take it as just a piece of information but practice the technique that suits him/her for at least one month to further the spiritual quest.

 

| These 112 meditation techniques are the ultimate source for self-realization | 


निस्तरंगोपदेशानाम शतमुक्तम समासतः |

द्वादशाभ्याधिकम देवि यज्द्न्यात्वा ज्ञानविज्जनः ||

O Goddess, I have briefly told you more than one hundred and twelve ways whereby the mind is rendered still without any surge of thought, knowing of which people become wise.

 

देवी के द्वारा पुछे गये प्रश्नो का समाधान प्रस्तुत कर इस प्रकरण का उपसंहार करते हुए भगवान भैरव कहते है कि हे देवि, इस तरह से मैने संक्षेप में यहा ११२ निर्विकल्प धारणाओका उपदेश किया है | ये सभी धारणाए साधक के चित्त को स्थिर बना देने वाली है | जिससे कि उसकी आत्मस्वरूप में प्रतिष्ठा हो जाती है | इन धारणाओ को ठीक से समझ लेने पर मनुष्य ज्ञानी हो जाता है, अर्थात भैरव बन जाता है |

 

 

Means of cessation

(Stillnees of mind)

Each of these vindnyan bhairava tantra dharanas will eradicate the mental modification or surges, which disturbs the brain waves keep the mind constantly in a state of flux. These leaves the brain energy depleted and exhausted. It is important to protect the mind from these surges, so that it gradually becomes surge-free. This is necessary for spiritual experience as well as for a healthy, happy and long life. Because tou cannot access wisdom the thoughts cease.

 

 

देवीने विचारलेल्या प्रश्नांची उत्तरे देऊन या प्रसंगाचा समारोप करताना भगवान भैरव म्हणतात, "हे देवी, अशाप्रकारे मी ११२ निर्विकल्प धारणा थोडक्यात सांगितल्या आहेत. या सर्व धारणा साधकाच्या मनाला स्थिर करतात, ज्यामुळे साधक आपल्या खऱ्या स्वरूपात स्थापित होतो. या धारणा योग्य रीतीने समजून घेतल्याने मनुष्य ज्ञानी होतो, म्हणजेच तो भैरव बनतो.

 

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Thursday, April 30, 2026

Meditation techniques (ध्यान तंत्र: VBT विज्ञान भैरव तंत्र) 112b

हर मास में, आपके सामने में एक ध्यानतंत्र रखुंगा | इसमें मूल संस्कृत श्लोक के साथ स्वामी सत्यसंगानंदा सरस्वती द्वारा किया हुआ अंग्रेजीमें वस्तुतः अनुवाद रहेगा | तथा हिंदीमें व्रजवल्लभ द्विवेदी द्वारा लिखा हुआ हिंदी भावानुवाद रहेगा | अन्तमें ओशो रजनीश द्वारा उस ध्यान तंत्र पर दिये हुए भाषण का सार तथा उसका मैने किया हुआ मराठी भावानुवाद रहेगा |

मेरा आपसे अनुरोध है की यह ध्यान तंत्र केवल जानकारी हेतू पढने के बजाय इसकी अनुभूती करने का प्रयास करे | अपने स्वभाव विशेष के अनुसार इसमेसे एक ही तंत्र आपको अंतिम अनुभूती देनेमें सक्षम है | इसकी खोज आपको करनी है |

हरी ओम त् सत् !             

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Every month I will be sharing one technique of meditation. There will be original Sanskrut text, and English / Marathi / Hindi commentary on the technique. I expect reader should not take it as just a piece of information but practice the technique that suits him/her for at least one month to further the spiritual quest.

| These 112 meditation techniques are the ultimate source for self-realization |  

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मानसं चेतना शक्तिरात्मा चेति चतुष्ट्ययम |

यदा प्रिये परिक्षणं तडा तदभैरवं वपु: ||

O dear one, when the mind, awareness, energy and individual self, this set of four dissolves, then the state of bhairava manifests.

 

संकल्पात्मक मन, चेतानात्मक बुद्धि, प्राणात्मक शक्ती और इनसे उपहित परिमित प्रमाता ये चारो जब सब तरह से विलीन हो जाते है अर्थात ये साधक को चिति के चमत्कारमात्र प्रतीत होने लगते है, तब वह भैरव स्वरूप को प्राप्त कर लेता है | इस स्थिती में साधक हिम से निर्मुक्त सूर्य के समान मायीय आवरणो से निर्मुक्त चिति के प्रकाश से आलोकित हो उठता है, प्रकाशमय बन जाता है | अर्थात इस तरह की भावना का दृढ अभ्यास करने पर साधक साक्षात भैरव हो जाता है |

 


Dissolution of the set of four

(I am bhairava)


In order to experience the state of bhairava, one have to give up everything that is individual, which includes the self. The senses and mind siply have no access to that dimension or range of experience to reach the sennlf. This dharana asks you to dissolve the set of four i.e. mind, awareness, energy and individual self. The resulting experience through this process of alchemy is the state of bhairava.

 


जेव्हा दृढनिश्चयी मन, चेतन बुद्धी, प्राणशक्ती आणि त्यांपासून उत्पन्न झालेला मर्यादित द्रष्टा, हे चारही घटक सर्व प्रकारे विलीन होतात, म्हणजेच, जेव्हा ते साधकाला चेतनेचे केवळ चमत्कार म्हणून दिसू लागतात, तेव्हा तो भैरवाचे स्वरूप प्राप्त करतो. या अवस्थेत, साधक मायेच्या आवरणांपासून मुक्त झालेल्या चेतनेच्या प्रकाशाने, जसा सूर्य बर्फातून मुक्त होतो, तसा प्रकाशित होतो. म्हणजेच, अशा भावनेचा दृढपणे सराव केल्याने, साधक स्वतः भैरव बनतो.

 

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Tuesday, March 31, 2026

Meditation techniques (ध्यान तंत्र: VBT विज्ञान भैरव तंत्र ) 112a

हर मास में, आपके सामने में एक ध्यानतंत्र रखुंगा | इसमें मूल संस्कृत श्लोक के साथ स्वामी सत्यसंगानंदा सरस्वती द्वारा किया हुआ अंग्रेजीमें वस्तुतः अनुवाद रहेगा | तथा हिंदीमें व्रजवल्लभ द्विवेदी द्वारा लिखा हुआ हिंदी भावानुवाद रहेगा | अन्तमें ओशो रजनीश द्वारा उस ध्यान तंत्र पर दिये हुए भाषण का सार तथा उसका मैने किया हुआ मराठी भावानुवाद रहेगा |

मेरा आपसे अनुरोध है की यह ध्यान तंत्र केवल जानकारी हेतू पढने के बजाय इसकी अनुभूती करने का प्रयास करे | अपने स्वभाव विशेष के अनुसार इसमेसे एक ही तंत्र आपको अंतिम अनुभूती देनेमें सक्षम है | इसकी खोज आपको करनी है |

हरी ओम त् सत् !             

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Every month I will be sharing one technique of meditation. There will be original Sanskrut text, and English / Marathi / Hindi commentary on the technique. I expect reader should not take it as just a piece of information but practice the technique that suits him/her for at least one month to further the spiritual quest.

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ज्ञानप्रकाशकम सर्वं सर्वेणात्मा प्रकाशकः |

एकमेकस्वभावत्वात ज्ञानं ज्ञेयं विभाव्यते ||

 

Knowledge reveals all and the self of all is the revealer. One should contemplate on the knowledge and the knower as being one and the same.

 

 

सभी प्रकाश्य अर्थात वेद्य वस्तुए ज्ञान से प्रकाशित होती है | प्रकाशक ज्ञान आत्मा से भिन्न नही है और सभी शब्दो से बोधित होने वाले ज्ञेय पदार्थ भी ज्ञान से पृथक नही है | इस तरह से ज्ञान और ज्ञेय की एकता की भावना करने से साधक स्वात्मस्वरूप में प्रतिष्ठित हो जाता है | सब कुछ चिन्मय है, ऐसी भावना करने से तत्वज्ञानी को यह प्रतीत होने लागता है कि ओ ज्ञान है, वही ज्ञेय अथवा ज्ञाता भी है | सबकुछ प्रकाशात्मक शिवमय है | इस प्रकार के ज्ञान का उन्मेष होने पर साधक शिव बन जाता है |

 

 

I am the knower

(Dharana on knowledge and knower)

This dharana referes to the heightened state of samadhi. Although there are many stages of samadhi, the two main categories are sabija and nirbija or samprajnata and asampajnata. In the later one, all dualities cease and consciousness remains steady despite the absence of any alambana or support in the form of thoughts and samskaras.

 

 

सर्व प्रकाशित वस्तू, म्हणजेच ज्या वस्तूंचे निरीक्षण करता येते, त्या ज्ञानाने प्रकाशित होतात. हे प्रकाशित करणारे ज्ञान आत्म्यापेक्षा वेगळे नाही आणि सर्व शब्दांद्वारे ज्ञात होणाऱ्या वस्तूदेखील ज्ञानापेक्षा वेगळ्या नाहीत. अशा प्रकारे ज्ञान आणि ज्ञात यांच्या एकत्वाची जाणीव झाल्याने, साधक आत्म्याच्या खऱ्या स्वरूपात स्थापित होतो. सर्व काही चैतन्य आहे हे जाणल्याने, सत्यज्ञानी व्यक्तीला हे जाणवू लागते की, जे काही ज्ञान आहे तेच ज्ञेय किंवा जाणणारा आहे. सर्व काही प्रकाशित करणारा शिव आहे. अशा प्रकारच्या ज्ञानाच्या जागृतीमुळे, साधक शिव बनतो.

 

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