हर मास में, आपके सामने में एक ध्यानतंत्र रखुंगा | इसमें मूल संस्कृत श्लोक के साथ स्वामी सत्यसंगानंदा सरस्वती द्वारा किया हुआ अंग्रेजीमें वस्तुतः अनुवाद रहेगा | तथा हिंदीमें व्रजवल्लभ द्विवेदी द्वारा लिखा हुआ हिंदी भावानुवाद रहेगा | अन्तमें ओशो रजनीश द्वारा उस ध्यान तंत्र पर दिये हुए भाषण का सार तथा उसका मैने किया हुआ मराठी भावानुवाद रहेगा |
मेरा आपसे अनुरोध है की यह ध्यान तंत्र केवल जानकारी हेतू पढने के बजाय इसकी अनुभूती करने का प्रयास करे
| अपने स्वभाव विशेष के अनुसार
इसमेसे एक ही तंत्र आपको अंतिम अनुभूती देनेमें सक्षम है | इसकी खोज आपको करनी है |
हरी ओम तत् सत् !
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Every month I will be sharing
one technique of meditation. There will be original Sanskrut text, and English
/ Marathi / Hindi commentary on the technique. I expect reader should not take
it as just a piece of information but practice the technique that suits him/her
for at least one month to further the spiritual quest.
| These 112 meditation techniques are the ultimate
source for self-realization |
अत्र
चैकतमे युक्तो जायते भैरव: स्वयम |
वाचा
करोति कर्माणि शापानुग्रहकारकः ||
One attains the state of bhairava, if established even
in one of these 112 techniques, and by his speech he confers blessings or
curses.
अब तक बताये गये उपदेशो में से किसी एक में भी समाहित हो जाने वाला साधक, अर्थात इन धारणाओ मे से किसी एक का भी निष्टापूर्वक अभ्यास करनेवाला योगी, भले ही मायामय उपाधि से आविर्भूत जागतिक प्रपंच में रम रहा हो, बिना प्रयत्न से वचन मात्र से सब कुछ कर सकता है, किसी को भी शाप या वरदान
देने में समर्थ हो सकता है | इस प्रकार का सामर्थ्य आ जाने पर भी जो साधक इसका
उपयोग न कर निरंतर समाधि में लीन बना रहता है, उसके चित्त में स्थिर आत्मस्वरूप की अभिव्यक्ती हो जाती है, वह स्वयं साक्षात भैरव बन जाता है, यह धृव सत्य है |
Perfection on one dhrana
(Importance of abhyas)
The one hundred and
twelve dharanas that have been described are so effective that, even if one of
them is mastered, the state of bhairava is experienced. That state of
consciousness is so powerful that the words uttered by such person inevitably
come true. In this way, speech confers on blessings or curses, as one becomes a
medium for the transmission of divine energy in this world.
आतापर्यंत
सांगितलेल्या धारणांपैकी पैकी कोणत्याही एका धारणेत तल्लीन झालेला साधक,
म्हणजेच यापैकी कोणत्याही संकल्पनेचा प्रामाणिकपणे सराव करणारा
योगी, जरी तो मायावी
उपाधीमुळे निर्माण झालेल्या सांसारिक गोष्टींमध्ये गुंतलेला असला तरी,
केवळ शब्दांनी कोणत्याही प्रयत्नाशिवाय सर्व काही करू शकतो,
तो कोणालाही शाप किंवा आशीर्वाद देण्यास सक्षम होऊ शकतो. अशी
शक्ती प्राप्त केल्यानंतरही, जो साधक तिचा वापर
करत नाही आणि सतत ध्यानात तल्लीन राहतो, त्याच्या
मनात आत्म्याचे स्थिर स्वरूप प्रकट होते, तो
स्वतःच भैरव बनतो, हे एक परम सत्य आहे.
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